मार्कशीट्स बैकडेट में बीपीएड में दाखिला दिखाकर तैयार की गई थीं.
त्रिपुर सुंदरी : श्री ह्रीं क्लीं ऐं सौ: ॐ ह्रीं क्रीं कए इल ह्रीं सकल ह्रीं सौ: ऐं क्लीं ह्रीं श्रीं नम:।
नोट : उपरोक्त में से किसी एक मंत्र का ही प्रयोग करें।
जीवन में आने वाले संकट और बाधाएं दूर होती हैं।
हर दिन अलग-अलग देवी का आह्वान और मंत्र जाप करें।
इस दौरान क्या करना चाहिए, क्या नहीं पूजा विधि क्या है, जानते हैं सब डिटेल में.
पूरे परिवार सहित माता का स्वागत करें, उनका पूजन, आरती करके भोग लगाएं और उनसे सुख-समृद्धि की कामना करें।
Gupt Navratri is particularly essential for people who are deeply involved in the field of tantra, yoga, mantra, and sadhana. This is the greatest time to obtain success in Distinctive sadhana and to get blessings with the Guru.
दुर्गा सप्तशती, देवी स्तोत्र या महालक्ष्मी मंत्र का पाठ करें।
इसमें पहले कलश को गंगा जल से भरें, read more उसके मुख पर आम की पत्तियां लगाएं और उस पर नारियल रखें।
चार वीर भैरों चौरासी, चार बत्ती पूजूं पान ए मिठाई,
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इस दौरान कलश स्थापना करना शुभ रहेगा. आप पहले से तैयारी कर लें और शुभ मुहूर्त के अंदर ही कलश स्थापना कर लें.
पूजा आरंभ करें: दीपक जलाकर देवी का आवाहन करें।
यह समय साधक को आत्म-चिंतन और आत्म-साक्षात्कार का अवसर देता है। ध्यान और तपस्या के माध्यम से व्यक्ति अपनी आध्यात्मिक उन्नति कर सकता है।